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Affiliated to Saurashtra University
Education Department, Govt. Of Gujarat

राज्य स्तरीय सेमिनार का अहवाल

10/10/2026
धर्मेंद्रसिंजी आर्ट्स कोलेज राजकोट

राज्य स्तरीय सेमिनार का अहवाल विषय ‘साहित्य में नवाचार : युवा लेखकों के लिए लेखन की नई दिशाएँ और अनुसंधान’ आयोजक : हिंदी विभाग एवं रुसर्च सेल - धर्मेंद्रसिंहजी आर्ट्स कॉलेज, राजकोट दिनांक : 26 सितंबर, 2026 स्थान : कक्ष संख्या 25, धर्मेंद्रसिंहजी आर्ट्स कॉलेज, राजकोट कार्यक्रम का स्वरूप : राज्य स्तरीय सेमिनार पंजीकृत प्रतिभागी : 30 विद्यार्थी 1. कार्यक्रम का परिचय एवं उद्देश्य धर्मेंद्रसिंहजी आर्ट्स कॉलेज, राजकोट के हिंदी विभाग द्वारा दिनांक 26 सितंबर, 2026 को ‘साहित्य में नवाचार : युवा लेखकों के लिए लेखन की नई दिशाएँ और अनुसंधान’ विषय पर राज्य स्तरीय सेमिनार का आयोजन किया गया। समकालीन साहित्य में हो रहे परिवर्तनों तथा युवा रचनाकारों के समक्ष उपस्थित नवीन संभावनाओं को दृष्टिगत रखते हुए इस सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों एवं युवा लेखकों को समकालीन साहित्य की नवीन प्रवृत्तियों, रचनात्मक लेखन की बदलती दिशाओं, लेखन में नवाचार, मौलिक चिंतन तथा साहित्यिक अनुसंधान की आधुनिक प्रविधियों से परिचित कराना था। इसके साथ ही प्रतिभागियों में साहित्य के प्रति रुचि, सृजनात्मक अभिरुचि, आलोचनात्मक दृष्टि तथा अनुसंधानपरक चेतना का विकास करना भी कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य रहा। कार्यक्रम में कुल 30 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया और उन्होंने विभिन्न सत्रों में सक्रिय सहभागिता की। 2. उद्घाटन एवं स्वागत कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की वरिष्ठ प्राध्यापिका डॉ. हितार्थी बहन अग्रवाल की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित दोनों आमंत्रित विद्वान् वक्ताओं का आत्मीय स्वागत किया तथा उनके महाविद्यालय में पधारने पर प्रसन्नता व्यक्त की। हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. संजय चावड़ा ने दोनों आमंत्रित विद्वान् वक्ताओं का शाब्दिक स्वागत करते हुए उनके प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने सेमिनार के विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में साहित्य के क्षेत्र में निरंतर परिवर्तन हो रहे हैं और युवा रचनाकारों के लिए लेखन तथा अनुसंधान की नवीन दिशाओं को समझना अत्यंत आवश्यक है। इसके पश्चात डॉ. किरण डोडिया ने प्रारंभिक उद्बोधन प्रस्तुत किया तथा कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया। उन्होंने सेमिनार के उद्देश्यों और विषय की समकालीन प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए उपस्थित विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों को कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित किया। 3. प्रथम विशेषज्ञ व्याख्यान सेमिनार के प्रथम विशेषज्ञ वक्ता के रूप में डॉ. शैलेश मेहता, प्रोफ़ेसर एवं अध्यक्ष, हिंदी विभाग, सौराष्ट्र विश्वविद्यालय, राजकोट को आमंत्रित किया गया। डॉ. मेहता ने साहित्य में नवाचार तथा समकालीन लेखन की बदलती दिशाओं पर विस्तारपूर्वक विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने साहित्य और समाज के पारस्परिक संबंधों, बदलते सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश तथा समकालीन जीवनानुभवों के साहित्य पर पड़ने वाले प्रभावों को स्पष्ट किया। उन्होंने विशेष रूप से युवा लेखकों के लिए मौलिक चिंतन, व्यापक पठन-पाठन, विषय की गहन समझ, भाषिक सजगता तथा अभिव्यक्ति में नवीनता की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि साहित्य में नवाचार का अर्थ केवल भाषा अथवा शिल्प में परिवर्तन नहीं है, बल्कि कथ्य, दृष्टि, संवेदना और अभिव्यक्ति के स्तर पर नवीन चेतना का समावेश भी साहित्यिक नवाचार का महत्त्वपूर्ण पक्ष है। डॉ. मेहता का व्याख्यान 90 मिनट का रहा। उनका व्याख्यान विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों के लिए ज्ञानवर्धक, प्रेरणाप्रद एवं मार्गदर्शक रहा। 4. द्वितीय विशेषज्ञ व्याख्यान द्वितीय विशेषज्ञ वक्ता के रूप में डॉ. अमी बहन दवे, एसोसिएट प्रोफेसर, श्रीमती जे. जे. कुण्डलिया आर्ट्स, कॉमर्स एवं बी.बी.ए. कॉलेज, राजकोट को आमंत्रित किया गया। डॉ. दवे ने युवा लेखकों के लिए लेखन की नई दिशाओं एवं साहित्यिक अनुसंधान की संभावनाओं पर अपना सारगर्भित व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने वर्तमान समय में लेखन के बदलते स्वरूप, नवीन विषयों की संभावनाओं, सृजनात्मक लेखन की प्रविधियों तथा साहित्यिक अनुसंधान की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने युवा रचनाकारों एवं शोधार्थियों को लेखन के साथ-साथ स्रोत-सामग्री के सम्यक् अध्ययन, प्रमाणिक संदर्भों के उपयोग, मौलिक चिंतन, आलोचनात्मक दृष्टि तथा शोध-पद्धति की वैज्ञानिकता के प्रति सजग रहने का मार्गदर्शन दिया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सार्थक साहित्य-सृजन के लिए संवेदनशीलता के साथ अध्ययनशीलता, जिज्ञासा और निरंतर आत्मपरिष्कार आवश्यक है। डॉ. दवे का व्याख्यान भी लगभग 90 मिनट का रहा। उनके व्याख्यान से विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों को लेखन तथा अनुसंधान के विभिन्न पक्षों को समझने का अवसर प्राप्त हुआ। 5. प्रश्नोत्तरी सत्र दोनों विशेषज्ञ वक्ताओं के व्याख्यानों के पश्चात प्रश्नोत्तरी सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र में प्रतिभागियों ने साहित्य में नवाचार, युवा लेखन, समकालीन साहित्यिक प्रवृत्तियों, लेखन की नवीन दिशाओं तथा अनुसंधान-पद्धति से संबंधित विभिन्न प्रश्न प्रस्तुत किए। दोनों विशेषज्ञ वक्ताओं ने प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का सहज, स्पष्ट एवं तर्कसंगत ढंग से समाधान किया। प्रश्नोत्तरी सत्र ने कार्यक्रम को संवादात्मक स्वरूप प्रदान किया तथा विद्यार्थियों को विषय-विशेषज्ञों के साथ प्रत्यक्ष संवाद का अवसर प्राप्त हुआ। 6. कार्यक्रम का संचालन पूरे कार्यक्रम का सुचारु एवं प्रभावी संचालन सातवें सत्र की छात्राओं रिद्धि एवं हितांशीबा द्वारा किया गया। दोनों छात्राओं ने कार्यक्रम के विभिन्न चरणों—स्वागत, वक्ताओं का परिचय, व्याख्यान-सत्र, प्रश्नोत्तरी तथा प्रमाण-पत्र वितरण—का क्रमबद्ध एवं शालीनतापूर्ण संचालन किया। उनके संचालन से कार्यक्रम में अनुशासन, समयबद्धता एवं सहज प्रवाह बना रहा। 7. प्रमाण-पत्र वितरण प्रश्नोत्तरी सत्र के उपरांत कार्यक्रम के समापन चरण में विशेषज्ञ वक्ताओं एवं प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। प्रमाण-पत्र वितरण के माध्यम से सेमिनार में उनके योगदान एवं सहभागिता को औपचारिक रूप से सम्मानित किया गया। 8. कृतज्ञ ज्ञापन कार्यक्रम के अंत में डॉ. इकराम अंसारी द्वारा कृतज्ञ ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। उन्होंने दोनों विद्वान् वक्ताओं, महाविद्यालय की वरिष्ठ प्राध्यापिका, प्राचार्य एवं महाविद्यालय प्रशासन, हिंदी विभाग के प्राध्यापकों, विद्यार्थियों तथा सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग प्रदान करने वाले सभी व्यक्तियों के प्रति भी कृतज्ञता प्रकट की। 9. प्रतिभोज एवं समापन सेमिनार के समापन के पश्चात उपस्थित अतिथियों, प्राध्यापकों, विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों के लिए प्रतिभोज की व्यवस्था की गई। प्रतिभोज के माध्यम से कार्यक्रम का समापन आत्मीय एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुआ। 10. कार्यक्रम के प्रमुख परिणाम एवं उपलब्धियाँ आयोजित राज्य स्तरीय सेमिनार के माध्यम से विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों को निम्नलिखित प्रमुख शैक्षणिक लाभ प्राप्त हुए— 1. विद्यार्थियों को समकालीन साहित्य में नवाचार की अवधारणा को समझने का अवसर मिला। 2. युवा लेखकों के लिए उपलब्ध लेखन की नवीन दिशाओं एवं संभावनाओं की जानकारी प्राप्त हुई। 3. प्रतिभागियों में मौलिक एवं सृजनात्मक लेखन के प्रति रुचि विकसित हुई। 4. साहित्यिक अनुसंधान में प्रामाणिक स्रोत, संदर्भ-सामग्री और शोध-दृष्टि के महत्त्व को समझने का अवसर मिला। 5. विद्यार्थियों को विषय-विशेषज्ञों के साथ प्रत्यक्ष संवाद एवं प्रश्नोत्तरी के माध्यम से अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त हुआ। 6. सेमिनार ने विद्यार्थियों में आलोचनात्मक एवं अनुसंधानपरक दृष्टिकोण विकसित करने में योगदान दिया। 7. विशेषज्ञ वक्ताओं के मार्गदर्शन से प्रतिभागियों को साहित्य-सृजन तथा अनुसंधान के समकालीन स्वरूप से परिचित होने का अवसर मिला। 8. कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में साहित्य के प्रति रुचि तथा सृजनात्मक अभिव्यक्ति की चेतना को प्रोत्साहित किया। 11. निष्कर्ष समग्रतः ‘साहित्य में नवाचार : युवा लेखकों के लिए लेखन की नई दिशाएँ और अनुसंधान’ विषय पर आयोजित राज्य स्तरीय सेमिनार एक ज्ञानवर्धक, संवादपरक एवं शैक्षणिक दृष्टि से उपयोगी कार्यक्रम के रूप में संपन्न हुआ। दोनों विशेषज्ञ वक्ताओं के लगभग 90-90 मिनट के सारगर्भित व्याख्यान, उसके पश्चात आयोजित प्रश्नोत्तरी तथा प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता ने कार्यक्रम को प्रभावी बनाया। कार्यक्रम में कुल 30 विद्यार्थियों का पंजीकरण हुआ। विशेषज्ञ वक्ताओं द्वारा दिए गए मार्गदर्शन से प्रतिभागियों को साहित्यिक नवाचार, युवा लेखन, सृजनात्मक अभिव्यक्ति तथा अनुसंधान की नवीन दिशाओं के संबंध में महत्त्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई। हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. संजय चावड़ा के शाब्दिक स्वागत, डॉ. किरण डोडिया के प्रारंभिक उद्बोधन, छात्राओं वृद्धि एवं हितांशी के सुव्यवस्थित संचालन तथा डॉ. इकराम अंसारी के कृतज्ञ ज्ञापन से कार्यक्रम का प्रत्येक चरण गरिमापूर्ण एवं व्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ। इस प्रकार धर्मेंद्रसिंहजी आर्ट्स कॉलेज, राजकोट के हिंदी विभाग द्वारा आयोजित यह राज्य स्तरीय सेमिनार विद्यार्थियों एवं युवा रचनाकारों को साहित्य-सृजन और अनुसंधान की नवीन दिशाओं से परिचित कराने की दृष्टि से सार्थक रहा तथा अपने शैक्षणिक उद्देश्यों की पूर्ति करते हुए सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।